Sunday, 10 November 2019

वफ़ा है ज़ात औरत की

अभी कुछ वक्त पहले ही,
कहा उसने की छोड़ो अब,
मोहब्बत छोड़ दी हमनें,
साथ जीने मरने की,
रिवायत तोड़ दी हमनें।

बोली तुझसे लगा ये मन है,
लेकिन सर पे माँ की कसम है।
हाँ, मुझको पछताना होगा,
पर तुझको छोड़ के जाना होगा।
माना बहुत कठिन है लेकिन,
मेरे हाथ पीले करने,
तुझको भी तो आना होगा।
मेरी बिदाई की रस्मो में,
तेरा भी फ़साना होगा।

मेरी इतनी बात समझ ले,
मेरी माँ का प्यारा है तू,
तू जो उनसे दग़ा करेगा,
फिर किस बात की वफ़ा करेगा।
ऐसे मेरी जान रुला मत,
मेरी माँ तो बागीचा है,
ऐसे उसका फूल चुरा मत।

बस इतना कहना है तुझसे कि,
मुझको चाहे माफ़ न करना।
हम दोनों के किस्सों का तू,
माँ के आगे जाप न करना।
माँ तो तेरी काज़ी है रे,
उसको ऐसे मत रुलाना।
हम दोनों थे साथ कभी भी।
ये अफ़साना भूल जाना।

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