Tuesday, 22 January 2019

भी सकती हैं।

चिडियाँ घोंसले में लौट आ भी सकती हैं।
या फिर दूसरा घोंसला बना भी सकती हैं।

तुझसे लड़ने का हौसला कहाँ से लाऊँ,
तू तो मुझको छोड़कर जा भी सकती हैं।

चराग़ों से दोस्ती करना भी तो संभाल के,
रोशनी देने वाली लौ घर जला भी सकती हैं।

सारथी

Sunday, 13 January 2019

दिल में

कितनी ख़्वाब दबाएं दिल में,
कितने ज़ख़्म छुपाएं दिल में।

कब से खाली खाली रहता था,
सो हम तुमको ले आएं दिल में।

हमने तुमको रोका ही कब था,
खैर तुम भी भर भर आएं दिल में।

मुलाक़ातें कम होती हैं तो क्या?
किसी और को ले आएं दिल में।

दिल भी गिन गिन थक जाता हैं,
कि कितने ज़ख़्म लगाएं दिल में।

तुम पिछली बार जो निकले थे ना,
फिर ना लौट के आएं दिल में।

अब बदचलन से हो गए हैं हम,
रोज़ कितने आएं जाएं दिल में।

कर लेते हैं

कुछ तो ज़माने की बात कर लेते हैं।
कुछ तेरे साये से मुलाक़ात कर लेते हैं।

कुछ तो ख़्वाब दिन में रूबरू होते हैं,
और कुछ के लिए रात कर लेते हैं।

कितना हसीन सबब हैं आशिक़ी का,
तो क्यों न फिर से शुरुआत कर लेते हैं।

बेसाख़्ता ही छा जाते हैं बादल आँखों में,
फिर हम आँखों से बरसात कर लेते हैं।

Saturday, 12 January 2019

आ गए

कितना कमज़ोर फैसला करके आ गए।
जान लेने वाले इल्तिज़ा करके आ गए।

वो तो उसके वज़ूद को मिटाने चले थे,
उसी के आगे वो सजदा करके आ गए।

मुश्किल सफ़र की हमसे क्यों पूछते हो,
हम तो मंजिल से झगड़ा करके आ गए।

बेरहमी का आलम ये हैं कि अपने बच्चे,
बाप को ज़िंदा दफना करके आ गए।

इक रोज़ माँ ने पूछा किसका फोन हैं,
ये बच्चे माँ को झिड़का करके आ गए।

अपनी बहन की बड़ी फ़िक्र करते हो ना,
तुम कितनी बहनों को नंगा करके आ गए।

Admi hi nahi

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मैं आदमी तो फ़क़त आदमी भी नहीं।
ये मेरा सलीका-ए-ज़िन्दगी भी नहीं।

दुश्मन को आँख दिखाना लाज़िम हैं,
मगर क्या जब आंख में पानी भी नहीं।

Wednesday, 9 January 2019

रहती हैं

तब पतवार कितनी सुलझी रहती हैं।
जब कश्ती लहरों में उलझी रहती हैं।

जीवन कितना आसान सा लगता हैं,
जब अपनी नाक में उंगली रहती हैं।

तो रात को अंधेरा क्यों हो जाता हैं,
गर आसमान में बिजली रहती हैं।

तुम तब भी अक्सर दिख जाते हो,
जब आँख पे पलकें चिपकी रहती हैं।

मैं जब - जब खामोश हो जाता हूँ,
तब - तब वो भी सहमी रहती हैं।

वो भी कितनी प्यारी बस्ती हैं,
जो रात में भी उजली रहती हैं।

दुनियां उसको वीरान सी लगती,
वो लड़की खुद में बहली रहती हैं।

नशे की लत तो मुझको हैं फिर,
वो क्यों बहकी बहकी रहती हैं।

सारथी