Sunday, 13 January 2019

दिल में

कितनी ख़्वाब दबाएं दिल में,
कितने ज़ख़्म छुपाएं दिल में।

कब से खाली खाली रहता था,
सो हम तुमको ले आएं दिल में।

हमने तुमको रोका ही कब था,
खैर तुम भी भर भर आएं दिल में।

मुलाक़ातें कम होती हैं तो क्या?
किसी और को ले आएं दिल में।

दिल भी गिन गिन थक जाता हैं,
कि कितने ज़ख़्म लगाएं दिल में।

तुम पिछली बार जो निकले थे ना,
फिर ना लौट के आएं दिल में।

अब बदचलन से हो गए हैं हम,
रोज़ कितने आएं जाएं दिल में।

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