Wednesday, 9 January 2019

रहती हैं

तब पतवार कितनी सुलझी रहती हैं।
जब कश्ती लहरों में उलझी रहती हैं।

जीवन कितना आसान सा लगता हैं,
जब अपनी नाक में उंगली रहती हैं।

तो रात को अंधेरा क्यों हो जाता हैं,
गर आसमान में बिजली रहती हैं।

तुम तब भी अक्सर दिख जाते हो,
जब आँख पे पलकें चिपकी रहती हैं।

मैं जब - जब खामोश हो जाता हूँ,
तब - तब वो भी सहमी रहती हैं।

वो भी कितनी प्यारी बस्ती हैं,
जो रात में भी उजली रहती हैं।

दुनियां उसको वीरान सी लगती,
वो लड़की खुद में बहली रहती हैं।

नशे की लत तो मुझको हैं फिर,
वो क्यों बहकी बहकी रहती हैं।

सारथी

No comments: