मैं हर रात तेरी याद में ऐसे सो जाता था।
आँख लगती, बिस्तर से बदन टकराता था।
मेरे तकिये आंसुओं में भीग जाया करते थे,
और मेरा कंबल मेरे बदन को सहलाता था।
रात मेरी आँखों में चाँद भरने आती थी,
मैं नींद भर तेरे ख्वाबों को सजाता था।
मेरे चाहने वाले थपकियां देने तरसते थे,
मैं तेरे हाथों को महसूस कर सो जाता था।
तेरे आरिज़ के तिल मेरी आँखों में अंधेरा करते,
तेरी आँखों के लगने से दिन ढल जाता था।
रातरानी के फूलों की खुशबू हवाओं में फैलती,
सिगरेट का धुआं मेरे फेफड़ो में समा जाता था।
सारथी