Wednesday, 3 July 2019

चल एक आवाज़ सुनें।

चल एक आवाज़ सुनें,

दिल के पैकर से आती हुई,
रौशनी से डरी सहमी, अंधेरों में छिपती छिपाती एक आवाज़ जो अकेले कहीं शोर मचा रही हैं।
किसी मासूम बच्चे की मानिंद, बे-लिबास पैकर लिए जो आंसुओ में भीगी कुछ गुनगुना रही हैं।

तमाम रंग-ओ-बू से बेख़बर, किसी बेख़याली में खोई हुई,
मनचले ख़्वाबों से परे, किसी के इश्क़ में बेख़बर सोई हुई।

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