तुम बिछड़ने का इरादा कर रही हो ना!
प्यार खुद से कुछ ज़्यादा कर रही हो ना!
सोचती हो दूर जाने से मोहब्बत मर जाएगी।
यानी ज़िंदगी तुम्हारे बगैर गुज़र जाएगी।
ठीक सोचती हो कि ज़िंदगी गुज़र जाएगी।
गलत सोचती हो कि मोहब्बत मर जाएगी।
मोहब्बत तो रूह के दरमियां हैं, और रूह कभी मरती नहीं ना!
और बिछड़ना तो मोहब्बत की सदाकत (सच्चाई) हैं,
या यूं कह दो की सदाकत की अलामत (लक्षण) हैं।
तो किस बिनाह पर सोच रही हो कि मोहब्बत मर जाएगी!
और कौन किससे बिछड़ सकता हैं, ना मैं तुमसे ना तुम मुझसे!
तुम तो मेरे अंदर हो और मैं तुम्हें जाने नहीं दूंगा।
हक़ीक़त में मुझमें तुम्हारे सिवा हैं ही क्या जिसे मैं खो दूँगा।
बताओ कैसे बिछड़ोगी!
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