ना बोला जाएगा, ना कुछ बताया जाएगा।
दर्द अपना है तो फिर खुद ही सहा जाएगा।
तुम सरेबाज़ार रोते फिरोगे तो सुनो फिर,
तुमको बारहा बेवजह ही रुलाया जाएगा।
तुम परिंद क़ैद करके क्या जता रहे हो,
मैं जानता हूँ सच को यूं ही टटोला जाएगा।
बेहतर होगा बाज़ आओ अपनी हरकतों से,
मुझसे और ज़्यादा चुप ना रहा जाएगा।
मैंने आँखों से खून बहाया हैं एक मुद्दत,
क्या समझते हो वो खून यूं ही ज़ाया जाएगा।
लौट जाओ अपने कबीलों की ज़ानिब तुम,
बुरा होगा गर मेरे खून में उबाल आ जाएगा।
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