Sunday, 2 June 2019

दिल की आवाज़

कौन सुनता हैं ?
आज तलक किसने सुना हैं ?
और आगे भी कौन सुनने वाला हैं ?

और अगर कोई सुनना भी चाहे तो कैसे सुने उस आवाज़ को जो सुनाई ही नहीं देती।
हाँ, दिल की आवाज़ कब किसे सुनाई देती हैं, उसे तो बाहर आते ही दफ़्न कर दिया जाता हैं।
वो आवाज़ जो चींखना भी चाहती हैं लेकिन उसके मुँह पर कोई पट्टी बांध दी जाती हैं।
लाचार बहुत लाचार सी वो आवाज़ अगर किसी तरह बाहर आ जाएं तो इस ज़माने को इसकी हक़ीक़त उसकी औक़ात से मुख़ातिब कराए।

इस चालक ज़माने ने आज तलक़ कोई कचहरी भी ना बनाई कि जहाँ दिल का कोई मुआमला दर्ज कराया जा सकें।
कोई वकील भी नहीं मिलता कि जो दिल के मुआमले की पैरवी करें और इंसाफ मिल सके।
ज़माने के महान कहे जाने वाले बड़े ही इज़्ज़तदार लोगो ने कोई कानून, कोई क़िताब भी नहीं लिखी जिसकी बिनाह पर कोई मुलाज़िम ही अपने मुआमले की पैरवी कर सके।

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