Thursday, 8 August 2019

सूरज आया था सबेरा लेकर।
रात चली गई ख़ासारा लेकर।

मेरा ही तो मुझमें रहता नहीं,
मैं क्या करूँगा तुम्हारा लेकर?

पिछली दफ़ा ही इतना सताया,
मरना हैं इश्क़ दोबारा लेकर!

फ़रमाया जाते हो! कुछ दे जाओ,
क्या करोगे दिल हमारा लेकर।

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