जो तुमसे पढ़ी ना गई वो कहानी ले आया हूँ।
तेरे मुकर जाने की हर बात ज़ुबानी ले आया हँ।
तेरी तस्वीर से लिपटकर रोया-कमाल ये भी नहीं हैं,
तू देख कि तेरी तस्वीर की आँख में पानी ले आया हूँ।
एक गुलाब पैरों में कुचल दिया गया तो क्या हुआ,
मैं बचाकर तेरे पैरों से मेरी ज़िन्दगानी ले आया हूँ।
गुमाँ इस बात का नहीं कि बच कर निकल गया मैं,
मलाल ये हैं कि जैसी की वैसी जवानी ले आया हूँ।
तुझ पर क्या-क्या कुर्बान किया याद नहीं मुझको,
फिक्र ये हैं क्या तेरी कोई मेहरबानी ले आया हूं।
अब शराब हैं तेरी जगह और मेरी जगह मैं ही हूँ,
देख मैं तेरे इश्क़ की वो शाम पुरानी ले आया हूं।
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