मैं फिर तेरा तलबगार हुआ तो फिर!
मुझको तुझसे फिर प्यार हुआ तो फिर।
यूँ रोज़ रोज़ के कॉल जँचते नहीं अब,
फिर से इश्क़ का इज़हार हुआ तो फिर!
यकीं तुम्हारा नहीं गवाँरा पहले जैसा अब,
अबकि गर मैं गद्दार हुआ तो फिर!
मरहम भी अब बाज़ारो में मिलता हैं,
ज़ख़्म अगर खुद्दार हुआ तो फिर!
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