कल बाबा नागार्जुन की कुछ रचनाएं सुन रहा था तो आज के हालात के मद्देनज़र कुछ पंक्तियां आ गई, देखिए!
देख नागा तेरे कविकुल को! देख नागा देख।
सत्ता की भाषा बोलते हैं, मज़हबों को तोलते हैं।
सूर्यवंश के ये रखवाले,रात अंधेरी डोलते हैं।
देख नागा देख,
कोई भगवा चोला ओढ़े, कोई हरा झंडा ले आया।
लाल किले की चाहत में जनमानस को ठुकराया।
देख नागा देख,
कोई फिल्मी दुनियां में ऊंचे पद पर बैठ गया,
और सत्ता के जूतों को नागा पूरा पूरा चाट गया।
देख नागा देख,
तू तो जन का नायक था ना तेरे वारिस कैसे हैं,
खुद का थूका खुद ही चाटते तेरे वारिस कैसे हैं।
देख नागा देख तेरे कविकुल को! देख नागा देख।
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