Saturday, 23 March 2019

Indo pak nafrat

आज की शाम दोस्तो के साथ बैठ vnit नागपुर के सामने का नज़ारा देखते वक़्त मौजूदा हालात के मद्देनजर बेसाख़्ता ही ये ख़याल आया कि क्या पड़ोसी मुल्क़ में भी इस वक़्त मेरी तरह के कुछ लड़के इसी तरह किसी सड़क किनारें की टपरी अपने दोस्तों के साथ बैठे सिगरेट का धुआं उड़ा रहे होंगे! क्या वो भी हमारी ही तरह मौजूदा हालात पर बातें कर रहे होंगे।
उनके सामने से भी ऐसी कुछ कारें गुज़र रही होंगी और उस कार में बैठा शख़्स अपने दफ्तर से घर जाने की जल्दी में होगा। और उसकी पत्नी बार-बार उसे कॉल कर के कहाँ हो, कहाँ तक पंहुचे, और कितना वक्त लगेगा, हर रोज़ देर से ही आते हो, आपको office के सिवा किसी बात की फिक्र नहीं हैं, यही सब सुना रही होगी, क्या उसके भी बच्चे घर पर पापा का इंतेज़ार कर रहे होंगे।
यही इसी तरह का गाड़ियों का शोर वहाँ भी होगा ना!
शायद हाँ, हाँ! तो फिर ये इतनी नफरत किस बात की।
सब एक जैसी ही तो ज़िंदगी जी रहे हैं।
फिर ये गोलाबारी, ये जंग जैसे हालात!
कौन और क्यों बनाता हैं।
और हम भी क्यों उनके बहकावे में आ जाते हैं!
सोचिए, और ख़त्म कीजिये ये नफरत।

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