उस एक चेहरे को तरस जाने की बात हैं।
लौट के उसी की तरफ जाने की बात हैं।
उसकी ज़ुल्फ़ें जो रूखी रूखी लगती हैं,
बस एक आंसू के बरस जाने की बात हैं।
अब जो मौसिकी का सुरूर छाया हैं ना,
उसकी चूड़ियों के खनक जाने की बात हैं।
हवाओं से मोहब्बत आसान तो नहीं थी,
बस एक झुमके के लटक जाने की बात हैं।
दरिया में शाम जो मैंने गुज़ारी हैं 'सारथी"
किसी की कमर के लचक जाने की बात हैं।
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