Saturday, 23 March 2019

Maa bholi hain na

तुम्हारी चौखट पर आते ही एक ख़ौफ़ समा गया मुझमें, अब और रुकने का हौसला नहीं था, बेशक़ दिल अब भी मेरे बस में नहीं था और बार बार मुझे रुकने के लिए मजबूर कर रहा था लेकिन मैं जानता था कि इतनी रुसवाइयों के बावज़ूद अगर मैं रुक गया तो फिर कभी चल नहीं पाऊंगा, बल्कि इतना गिर जाऊंगा कि फिर उठने के क़ाबिल भी ना रह पाऊँ!
और मैं चल दिया एक नई दुनियां की ज़ानिब!
जहाँ मैं मेरी मर्ज़ी मेरे तौर तरीकों से जी सकता हूँ।
और मैं खुश हूँ, हाँ! कभी कभी तुम्हारी याद आ जाती हैं, पर मैं तब खुद को समझा लेता हूँ कि उन रुसवाइयों से बेहतर हैं ये ज़िन्दगी। और अब तो शोहरतें भी हैं, जो शायद तुम्हारे साथ रहकर नहीं मिल पाती।
तुम समझ रही हो ना!
मैं खुश हूँ,
नई दुनियां और नए दोस्तो के साथ।
माँ भी अब मुझसे खुश रहती हैं कि अब मैं उनके साथ ज्यादा वक्त बात कर लेता हूँ और ना भी कर पाया तो समझ जाती हैं कि काम की मसरूफियत हैं।
हालाँकि तब भी मैं तुम में ही खोया रहता हूँ, लेकिन माँ को ये सब कहाँ पता हैं, माँ तो भोली हैं ना।
मेरे झूठ को भी सच मान लेती हैं।
हाँ मैं खुश हूँ, और माँ भोली हैं।
बिल्कुल पहले की तरह।
हाँ! माँ पहले भी भोली थी, बस तुमको समझ नहीं आई।

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