बहुत जज़्बे हौसलें बहुत हैं।
हमने पाले सपने बहुत हैं।
गीत ग़ज़लें गा रहा हूँ पर,
मुँह में मेरे छाले बहुत हैं।
खामोशी का ये सबब हैं,
मैंने मसले उछाले बहुत हैं।
सफेदपोशो के अंदर देखो,
दाग छिटके काले बहुत हैं।
शोहरतों का गुमाँ नहीं हैं,
मैंने खोएं निवाले बहुत हैं।
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