यही हादसा तो बारहा हुआ।
कौन मेरे जाने से तन्हां हुआ।
किसकी फितरत में मिलना हुआ,
मैं उसका हुआ ना वो मेरा हुआ।
इसकी मर्ज़ी जिसे चाहे ख़ुदा करें,
दिल पर कब जोर किसका हुआ।
मैं उससे रब्त करूँ तो क्यों नहीं,
उसके जैसा और कौन मेरा हुआ।
वो क्यों कर ना मुझको रोकेगी,
सिगरेट पीने से किसका भला हुआ,
उसकी हर बात मानना गवारा हुआ।
वो एक शख़्स जैसे मेरा ख़ुदा हुआ।
सारथी
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