Sunday, 7 April 2019

बहुत है

उसने मुझे टोका बहुत हैं।
वो मेरा आईना बहुत हैं।

आज चलते हैं यहाँ से,
ये शहर तन्हां बहुत हैं

वो मिलता रोज़ उससे हैं,
वो शख़्स जो मेरा बहुत है।

छोड़ दे सब ख़्वाहिशों को,
ख़्वाहिशों में झगड़ा बहुत हैं।

दर्द तेरा मिल गया तो,
दर्द से वास्ता बहुत हैं।

आज फिर हम साथ में हैं,
आज फिर फ़ासला बहुत हैं।

किसने छेड़ा हैं मुक़द्दर,
आज दिल परीशां बहुत हैं।

उसने लिखा दर्द अपना,
दिल मेरा रोया बहुत हैं।

वो आज किसको रो रही,
मैंने ये सोचा बहुत हैं।

उसको बोलो बस करें अब,
मैंने भी रोका बहुत हैं।

पागलों सी क्यों हुई वो,
उसे तो तज़र्बा बहुत हैं।

हाय उसकी ज़िद का आलम,
ज़िद का पैमाना बहुत हैं।

सारथी रोको उसे तुम,
उसने तुम्हें माना बहुत हैं।

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