Poetry, story, blogs
तू मेरी तिश्नगी का, कुछ तो ख़याल कर। शरमा के लिपट जा, कुछ तो ख़याल कर।
ख़्वाहिशें दिल में गोते पे गोते लगा रही हैं। तू आ के ठहर जा, कुछ तो ख़याल कर।
Post a Comment
No comments:
Post a Comment