Saturday, 6 April 2019

समंदर

जाने क्यों ना बहा समंदर।
किसके पीछे रहा समंदर।

अपनी कश्ती बीच भंवर थी,
और ज़ोर से उड़ा समंदर।

प्यास कहती रेत निचोड़ो,
अपने हिस्से कहाँ समंदर।

हरदम सहरा से घबराया,
रेत से डरा डरा समंदर।

वो तो हवा का ज़ोर था,
हमको लगा उड़ा समंदर।

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