मुझमें तेरे बाद और कोई बवाल नहीं।
ज़िंदा हूँ कि मर गया कोई ख़याल नहीं।
वो भी हँसता खेलता नज़र आता हैं,
उसे भी मेरे हिज्र का कोई मलाल नहीं।
हम दोनों अपने अपने रास्ते चल पड़े हैं,
मुमकिन अब हम दोनों का विसाल नहीं।
माना कि तेरे चाहने वाले और भी हैं,
तेरे रुख़ पे मगर पहले सा जमाल नहीं।
मैं आज़ाद परिन्दों सा उड़ रहा हूँ अब,
अब तू जो करता मेरी देखभाल नहीं।
मेरे रूठने भर से टूट ही जाएगा तू,
इस तरह से भी तू मुझको संभाल नहीं।
तुझे सवाल का जवाब दूँ भी तो कैसे,
तू सवाल का जवाब हैं सवाल नहीं।
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